कलम..

कलम..

Sunday, 7 July 2013

एक टुकड़ा चाँद का ...






पड़ जाये रंग थोडा फीका नीले आसमान का 

हो जाये मंद गति तेज चलती हवाओं की 
थोडा समंदर भी सूख जाये 
एक टुकड़ा चाँद का भी टूट जाये 
जब मेरी जिंदगी मुझ से रूठ जाये 

ये दीवारें बस में न रहेंगी 

तुम से मेरे दर्द की कहानी कहेंगी 
सब्र इनका न टूटने पाए 
कोई प्यार से इनको समझाए 
जब मेरी जिंदगी मुझ से  रूठ जाये 

न रखना मुझ पर कोई एहसान

मिटा देना मेरा नामो निशान 
परछाई को मेरी कोई दफनाये 
कोई यादों को भी मेरी जलाये 
जब मेरी जिंदगी मुझ से रूठ जाये 

बस न हो मुस्कराहटों का रंग फीका 

चाहत के फूलों का न मुरझाये बगीचा 
चंद दिए आस के जगमगायें 
कोई पलकों पर आंसू न लाये 
जब मेरी जिंदगी मुझ से रूठ जाये

21 comments:

  1. न रखना मुझ पर कोई एहसान मिटा देना मेरा नामोनिशान..... बहुत ही भावमयी और प्रेम मयी रचना ....

    ReplyDelete
  2. आपकी यह रचना कल मंगलवार (09-07-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

    ReplyDelete
  3. बहुत भावमयी रचना....

    ReplyDelete
  4. जब कोई हमारी जिन्दगी बन जाए तो उसका रूठना गवारा नहीं होता कभी
    बहुत सुन्दर भावमयी रचना

    ReplyDelete
  5. सब्र इनका न टूटने पाए
    कोई प्यार से इनको समझाए '
    ......
    बहुत खूब !

    ReplyDelete
  6. मंजूषा जी, बहुत बहुत बधाई आपको, बहुत ही सुन्दरता से शब्दों का प्रयोग किया है, ऐसी रचना कभी कभी बनती है, आभार











    यहाँ भी पधारे ,
    रिश्तों का खोखलापन
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_8.html

    ReplyDelete
  7. बेहतरीन..चाँद का वो दाग वाला हिस्सा टूट ही जाए तो अच्छा है...

    ReplyDelete
  8. बहुत सुन्दर पंक्तियां व भावमयी रचना ...
    दर्द को बयां करती ये पंक्तिया...ं
    परछाई को मेरी कोई दफनाये
    कोई यादों को भी मेरी जलाय....
    बधाई

    ReplyDelete
  9. अरे क्यूँ रुठे ज़िन्दगी भला.....काश के हर पल मुस्कुराए....

    सुन्दर भाव...

    अनु

    ReplyDelete
  10. न रखना मुझ पर कोई एहसान
    मिटा देना मेरा नामो निशान
    परछाई को मेरी कोई दफनाये
    कोई यादों को भी मेरी जलाये
    जब मेरी जिंदगी मुझ से रूठ जाये ...

    यादें कहां पीछा छोडती हैं ... जिंदगी रूठने पे तो बेहद सताती हैं ...
    एहसास भरी रचना ...

    ReplyDelete
  11. bhavo aur shabdo ka shandar samavesh-***

    ReplyDelete
  12. जब मेरी जिन्दगी मुझसे रूठ जाये
    जीवन के अनकहे संदर्भों को व्यक्त करती
    प्रेम और करुणा की सुंदर रचना

    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई

    आग्रह मेरे ब्लॉग में समल्लित हों
    http://jyoti-khare.blogspot.in

    ReplyDelete
  13. सुन्दर पंक्तियां उम्दा भाव ..........न रखना मुझ पर कोई एहसान
    मिटा देना मेरा नामो निशान
    परछाई को मेरी कोई दफनाये
    कोई यादों को भी मेरी जलाये
    जब मेरी जिंदगी मुझ से रूठ जाये

    ReplyDelete
  14. बहुत भावमयी रचना...

    ReplyDelete
  15. कल 12/08/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार यशवंत जी .....

      Delete
  16. सुन्दर भावमय रचना --मेरे ब्लॉग का भी फोलो करे ख़ुशी होगी
    latest post नेताजी सुनिए !!!
    latest post: भ्रष्टाचार और अपराध पोषित भारत!!

    ReplyDelete
  17. सुंदर रचना---बधाई
    http://savanxxx.blogspot.in

    ReplyDelete